GARIYABAND. newsupindia.com छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। फोर्स के बढ़ते दबाव को देखते हुए 18 लाख रुपये के इनामी 3 हार्डकोर नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ सरेंडर कर दिया। प्रदेश में नक्सलियों के खिलाफ लगातार हो रही एनकाउंटर से नक्सलियों के पैर उखड़े हुए हैं। मुठभेड़ में नक्सली मारे जा रहे हैं या फिर गिरफ्तार हो रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा मार्च 2026 तक नक्सलियों का खात्मा करने का संकल्प लेने से माओवादी संगठन दहशत हैं।
बता दें कि ओडिशा बॉर्डर पर छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे गरियाबंद जिले में एक महीने पहले हुए मुठभेड़ में साढ़े तीन करोड़ रुपये से ज्यादा के इनामी नक्सली मारे गए थे, जिसमें नक्सली सेंट्रल कमेटी के सदस्य जयराम उर्फ चलपति को भी शामिल था। चलपती पर एक करोड़ का इनाम था। इस मुठभेड़ में कुल 18 नक्सली मारे गए थे। अब गरियाबंद जिले में 18 लाख रुपये के इनामी नक्सलियों ने सरेंडर किया है। सरेंडर करने वाले माओवादियों में एसडीके एरिया कमेटी का डिप्टी कमाण्डर दिलीप उर्फ संतू (8 लाख इनामी), मंजुला उर्फ लखमी (5 लाख इनामी), और सुनीता उर्फ जुनकी (5 लाख इनामी) शामिल है। सरेंडर करने तीनों नक्सली आधुनिक हथियार भी लेकर आए थे।
खुशहाल जीवन जीने किया सरेंडरः IG
रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा ने कहा कि शासन की आत्मसमर्पण-पुनर्वास योजना और आत्मसमर्पित नक्सलियों के खुशहाल जीवन से प्रभावित होकर तीन हार्डकोर माओवादियों ने आज सरेंडर किया है। इन तीनों नक्सलियों ने बताया कि माओवादी संगठन में शामिल होने के बाद उन्हें कई प्रकार के अत्याचारों का सामना करना पड़ा। उन्होंने माओवादी विचारधारा को खोखला करार दिया और बताया कि नक्सल संगठन ने उन्हें हिंसा के लिए मजबूर किया था।
मुख्यधारा में जुड़ने वालों का स्वागतःसाय
इस मामले में छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर ट्वीट कर लिखा- ‘छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर गरियाबंद जिले में 18 लाख के इनामी 3 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। नक्सलवाद के कुचक्र में फंसे लोग अब पुनः समाज की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं, जो स्वागतेय है। हमारी सरकार इन लोगों के पुनरुत्थान के लिए तत्पर है।