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Saturday, August 30, 2025

पुराना ठेका खत्म: नया अब दो साल का होगा, अहाता के लिए मंगाए गए आवेदन, इस तारीख तक ऑनलाइन भरना होगा टेंडर…

RAIPUR. न्यूजअप इंडिया.कॉम
छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग की नई पॉलिसी के तहत शासकीय शराब दुकानों के पास खोले गए अहाता का ठेका 31 मार्च को खत्म हो गया है, जिसके बाद सभी अहाते भी बंद हो गए हैं। विभाग ने इस पॉलिसी में अब आंशिक संशोधन किया है। इसके तहत अब ठेका एक वर्ष के लिए नहीं, बल्कि दो वर्ष के लिए दिया जाएगा। यानी एक अप्रैल 2025 से लेकर 31 मार्च 2027 तक के लिए अहाता ठेके पर दिया जाएगा। अहाता के लिए टेंडर भरना पड़ेगा।

अहाता चलाने वालों के लिए आबकारी विभाग ने ऑनलाइन टेंडर भी जारी कर दिया है। इसके तहत 11 अप्रैल तक आवेदन लिए जाएंगे। इस बार भी ठेका उसी को मिलेगा, जो आवेदन में अहाता के लिए सबसे ज्यादा बोली लगाएगा। हालांकि रायपुर जिले में पहली बार अहाता पाने के लिए लोगों ने बढ़-चढ़कर बोली लगाई थी, जिसके कारण प्रत्येक अहाता विभाग द्वारा निर्धारित की गई बोली से दोगुना से चारगुना अधिक कीमत पर गया था। इस कारण 51 ठेकेदारों को अहाता सरेंडर करने के कारण ब्लैक लिस्टेड भी किया गया था। रायपुर आबकारी विभाग उपायुक्त रामकृष्ण मिश्रा ने बताया कि पुराना ठेका 31 मार्च 2025 को खत्म हो गया। नया ठेका दो वर्ष के लिए दिया जाएगा। इसके लिए आवेदन 11 अप्रैल तक मंगाए गए हैं। सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले को ठेका मिलेगा।

रायपुर जिले में 61 अहाता
रायपुर जिले में 61 अहाता ठेके पर दिए गए थे, जिनमें से 29 अहातों को ठेकेदार चला नहीं पाए। इनमें से कई ठेकेदार तो विभाग को सूचित किए बगैर अहाता बंद कर फरार हो थे, वहीं कई ठेकेदारों ने सूचना दी, लेकिन सरेंडर करने के बाद अनुबंध के अनुसार लाइसेंस फीस जमा नहीं की गई। इस तरह नियमों का पालन नहीं करने वाले 51 ठेकेदारों को आबकारी विभाग ने ब्लैक लिस्टेड किया है।

94 लाख तक गया था ठेका
रायपुर जिले में अहातों के लिए 3 बार टेंडर निकाले गए थे। ये अहाते एक मई 2024 से 31 मार्च 2025 तक के लिए दिए गए हैं। पहला टेंडर 56 अहाताओं के लिए निकाला गया था। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन मंगाए गए थे, जिनमें एक अहाता को छोड़कर सभी अहातों का टेंडर खुला था। इन अहातों का ठेका बोली पद्धति से हुआ था। सबसे अधिक बोली वाले आवेदक को अहाता का ठेका दिया गया था। अहाता 25 लाख रुपये से लेकर 94 लाख रुपये तक गए थे।

अहातों से 12 करोड़ की आय
अहाता पॉलिसी के तहत विभाग को ठेके पर दिए गए अहाता से 20 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होना था, लेकिन ठेकेदारों के सरेंडर करने और फीस जमा नहीं करने के कारण टार्गेट भी अधूरा रह गया है। विभाग को अब तक अहाता से फीस के रूप में लगभग 10 करोड़ रुपये मिले हैं, जबकि लगभग पौने दो करोड़ रुपये बैंक गारंटी के रूप में जमा है। इस तरह कुल लगभग 12 करोड़ रुपये का राजस्व ही मिल पाया है, जो टारगेट से लगभग 8 करोड़ रुपये कम है।

सरेंडर ठेकेदारों से होगी वसूली
अहाता सरेंडर होने के कारण विभाग को करीब 8 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। इस राशि की रिकवरी के लिए विभाग अब पॉलिसी के नियम के तहत ठेकेदारों से वसूली करेगा। पॉलिसी के नियम में धारा 31 का भी उल्लेख है। इस धारा के तहत अब विभाग सरेंडर करने वाले ठेकेदारों से अनुबंध के अनुसार जो राशि तय हुई थी, उसकी वसूली भू-राजस्व की भांति करेगा यानी 8 करोड़ उन ठेकेदारों से वसूल की जाएगी, जो अनुबंध तोड़कर अहाता बंद कर चुके हैं।

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