DURG. न्यूजअप इंडिया.कॉम
छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रही बांग्लादेशी (रोहिंग्यो) घुसपैठियों को दुर्ग पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों नाम बदलकर छत्तीसगढ़ के दुर्ग और रायपुर में रह रही थी। एक नाम बदलकर सनाया नूर से सपना हो गई तो दूसरा खुशबू से रानी बन गई। दुर्ग STF ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अब पुलिस फर्जी रूप से इनका दस्तावेज बनाने वालों की तलाश कर रही है। इससे एक सप्ताह पहले भी दो बंग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार हो चुके हैं। दुर्ग में अब तक चार की गिरफ्तारी हो चुकी है।
मिली जानकारी के अनुसार दुर्ग के मोहन नगर थाना क्षेत्र के जयंती नगर स्थित मकान में अपनी पहचान छुपाकर निवास करने वाली बांग्लादेशी महिला सपना शर्मा और रानी पासवान को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों महिलाएं अब तक अलग-अलग कई स्पा सेंटर और कॉल सेंटरों में काम कर चुकी है। इन महिलाओं के पास फर्जी एवं कूटरीचित दस्तावेज के आधार पर आधार कार्ड, पेन कार्ड, मतदाता परिचय पत्र और बैंक पासबुक पुलिस ने जब्त किया है। STF टीम ने जब दोनों महिलाओं से पूछताछ की तब उन्होंने अपना नाम सपना शर्मा उर्फ सपना मंडल और खुशबू उर्फ रानी पासवान बताया।
बाग्लादेश के कई नंबरों से लगातार सम्पर्क में थी
पुलिस के मुताबिक दोनों महिलाओं के कब्जे से प्राप्त दस्तावेज और मोबाइल चेक करने पर पुलिस ने पाया कि सपना शर्मा उर्फ सपना मंडल का वास्तविक नाम सनाया नूर है जो मूलतः जोरहाट जिला दीनाजपुर बाग्लादेश की रहने वाली है। वह लगभभ 15 वर्ष पूर्व भारत बाग्लादेश सीमा को अवैध रूप से पार कर बिना वैध दस्तावेज के 8 वर्षों से रायपुर के चंगोराभाठा में निवास कर चुकी है। सनाया नूर ने बाग्लादेशी नागरिक के मूल पहचान को छिपाते हुए स्वयं को भारतीय नागारिक सिद्ध करने के लिए वर्ष 2019 में फर्जी दस्तावेज तैयार कर अभय शर्मा नाम के व्यक्ति को अपना पति बताकर फर्जी आधार कार्ड, पेन कार्ड और मतदाता परिचय पत्र तैयार कर लिया था। जांच में पाया गया कि सनाया नूर इंटरनेट के माध्यम से बाग्लादेश के कई नंबरों से लगातार सम्पर्क में थी।
15 साल पहले भारत आई खुशबू बेगम
बाग्लादेशी महिला रानी पासवान उर्फ खुशबू ने पूछताछ पर उन्होंने अपना नाम खुशबू बेगम पिता जेर मोहम्मद निवासी जोबरहाट जिला दीनाजपुर बाग्लादेश का मूल निवासी होना बताया। यह भी लगभग 15 साल पहले अवैध रूप से बिना वैध दस्तावेज के बाग्लादेश से भारतीय सीमा में प्रवेश किया है और छत्तीसगढ़ पहुंच गई। खूशबू बेगम भी फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड बनवाया है। दोनों बाग्लादेशी महिलाओं के विरूद्ध बिना किसी वैध दस्तावेज के अवैध रूप से भारत में निवासरत होकर बाग्लादेशी नागरिक की मूल पहचान छिपाने, फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनका दुरूपयोग करने पर धारा 318(4), 319(2), 336(3), 3(5) बीएनएस, 14 विदेशी विषयक एक्ट 1946, 12 पासपोर्ट एक्ट, 1967 एवं 3 पासपोर्ट एक्ट के तहत मोहन नगर थाने में मामला दर्ज कर दोनों को जेल भेजा गया है।
फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों की तलाश
STF अब फर्जी दस्तावेजों से आधार कार्ड, वोटर ID बनाने वालों की तलाश कर रही है। वहीं सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि बांग्लादेश के निवासी छत्तीसगढ़ तक कैसे आए। राज्यों की पुलिस और इंटेलिजेंस को कोई सूचना भी नहीं मिली। छत्तीसगढ़ आकर दोनों ने कितनी आसानी से देश की नागरिकता से संबंधित दस्तावेज तैयार करवा लिए। आधार कार्ड, वोटर आईडी, पेन कार्ड भी बनावा लिए। बैंकों में खाते भी खुल गए और किसी को पता तक नहीं चला। दोनों बाग्लादेशी नागरिकों द्वारा तैयार किए गए फर्जी दस्तावेज बनाने में सहयोग करने वाले व्यक्तियों की तलाश अब पुलिस कर रही है।