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Thursday, January 22, 2026

बालोद जंबूरी के नाम पर खेल: टेंडर खुलने से पहले ही शुरू हो गया था काम, क्या पहले से तय था ठेकेदार, GeM टेंडर सिर्फ दिखावा था…?

RAIPUR. newsupindia.com
छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से सरकारी खरीद प्रणाली GeM Portal से टेंडर सवालों के घेरे में है। मामला भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के जंबूरी आयोजन से जुड़ा है, जहां 1 सितंबर 2025 को टेंडर को लेकर जारी गाइडलाइन की खुलेआम अनदेखी करते हुए करीब 5 करोड़ रुपये के संभावित घोटाले की पटकथा पहले ही लिख दी गई। निर्माण कार्य के लिए जो बीड भरा गया था, उसकी तारीख खुलने की थी 20 दिसंबर शाम 5 बजकर 30 मिनट थी, लेकिन ठेकेदार अपने काम को लेकर इतना आश्वस्त था कि बीड खुलने से पहले की काम शुरू कर दिया गया। अब सवाल उठता है कि काम किसे देना है क्या यह पहले से तय था और यदि तय था तो जेम पोर्टल का आडम्बर क्यों किया गया।

सूत्रों के मुताबिक 8 दिसंबर को जंबूरी आयोजन के लिए भूमिपूजन खुद शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा किया गया। इसके ठीक दो दिन बाद, 10 दिसंबर को जेम पोर्टल पर टेंडर फ्लोट कर दिया गया। नियमों के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और तय समय-सीमा का पालन अनिवार्य होता है, लेकिन इस पूरे मामले में नियम सिर्फ कागज़ों तक सीमित नजर आते हैं। टेंडर की क्लोजिंग 20 दिसंबर की शाम 5:30 बजे तय थी और इसी दिन टेंडर फाइनल किया जाना था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि क्लोजिंग के समय विभाग का कार्यालय बंद मिला। टेंडर से संबंधित जानकारी के लिए जारी किए गए मोबाइल नंबर भी बंद पाए गए।

जिस दिन टेंडर खुला आधा काम हो गया था
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि 20 दिसंबर की शाम को टेंडर फाइनल किया गया, लेकिन बालोद के मालीघोरी मैदान में टेंट लगाने का काम टेंडर खुलने से एक सप्ताह पहले ही शुरू हो चुका था। दरअसल मालीघोरी मैदान में दर्जनों टैंट गाड़े जा चुके थे। इसके अलावा अस्थाई आवास को तैयार करने के लिए लगाने वाला सामान भी मैदान में पड़ा हुआ है। यह काम एक रात में तो संभव नहीं है। अब सवाल उठता है कि जब टेंडर फाइनल ही नहीं हुआ था, तब काम कैसे शुरू हो गया? क्या कंपनी पहले से ही तय कर ली गई थी?

राष्ट्रीय मुख्यालय ने जारी किया था सर्कुलर
मालीघोरी मैदान बालोद को जंबूरी आयोजन स्थल के रूप में 14 नवंबर 2025 को भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के राष्ट्रीय मुख्यालय द्वारा जारी सर्कुलर में घोषित किया गया था। सशक्त युवा, विकसित भारत थीम पर बुधली, बालोद में जंबूरी का आयोजन प्रस्तावित किया गया था। बुधली के मालीघोरी मैदान को एक अस्थायी शहर का रूप दिया गया। यहां 12 विशाल पंडाल, बिजली, पेयजल, शौचालय, संचार केंद्र, मेडिकल सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था और एक अस्थायी स्टेडियम तैयार किया गया, जहां सांस्कृतिक और औपचारिक कार्यक्रम होंगे। इन्हीं कामों के लिए जेम पोर्टल में टेंडर निकाला गया।

सवालों के घेरे में टेंडर की शर्तें

  1. पहली शर्त में केवल सेंट्रल और स्टेट पीएसयू का अनुभव मांगा गया, जबकि सरकारी विभागों के अनुभव को जानबूझकर बाहर रखा गया।
  2. दूसरी शर्त में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और केंद्रीय मंत्रियों के कार्यक्रमों का अनुभव अनिवार्य किया गया है, जबकि जंबूरी के घोषित कार्यक्रमों में न प्रधानमंत्री शामिल हैं और न ही राष्ट्रपति। कार्यक्रम में राज्यपाल, मुख्यमंत्री और कुछ केंद्रीय मंत्रियों की उपस्थिति प्रस्तावित है।
  3. सबसे विवादित शर्त यह है कि टेक्निकल बिड में 100 में से कम से कम 90 अंक पाने वाले बोलीदाता की ही फाइनेंशियल बिड खोली जाएगी, जबकि विभागीय तकनीकी मानकों के अनुसार 51 अंक प्राप्त कर सभी अनिवार्य योग्यताएं पूरी की जा सकती हैं। इसके बावजूद ऐसे बोलीदाता स्वतः अयोग्य घोषित कर दिए जाएंगे।

क्या कहते हैं जानकार
फाइनेंस से जुड़े लोगों की मानें तो ऐसी शर्तें अक्सर पहले से तय कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए रखी जाती हैं, ताकि बाकी प्रतियोगी खुद-ब-खुद बाहर हो जाएं। बालोद जिले में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर का भारत स्काउट्स एंड गाइड्स जंबूरी 9 से 14 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जाना है। यह आयोजन संगठन की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रहा है, जिसमें देश-विदेश से करीब 12 हजार प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। लेकिन अब इस भव्य आयोजन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बालोद जंबूरो के लेकर सुलगते सवाल

  • आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि टेंडर में 21 दिन की अनिवार्य समय-सीमा का पालन नहीं किया गया?
  • जब टेंडर फाइनल 20 दिसंबर को हुआ तो एक सप्ताह पहले ही टेंट कैसे लग गए?
  • क्या पूरी प्रक्रिया पहले से तय कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए रची गई थी?
  • हर बार जेम की आड़ में आर्थिक साजिश और भ्रष्टाचार का खेल क्यों सामने आता है?
  • अगर कंपनी पहले से तय थी, तो फिर शॉर्ट टाइम का टेंडर निकालने की जरूरत क्यों पड़ी?
  • इस पूरे मामले ने जेम पोर्टल की पारदर्शिता, सरकार और अधिकारी के गठजोड़ पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
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