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Friday, June 21, 2024

आतंकी संगठनों से जुड़े कवर्धा के साधराम यादव हत्याकांड के तार! 6 आरोपियों पर लगाया गया UAPA एक्ट, इसमें क्या सजा जानिये…

कवर्धा. न्यूजअप इंडिया
छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के लालपुर गांव में साधराम यादव हत्याकांड में गिरफ्तार किए गए 6 आरोपियों पर धारा 16 UAPA एक्ट जोड़ा गया है। छत्तीसगढ़ में गैर नक्सली मामलों के बाद पहली बार किसी आरोपी पर कार्रवाई की गई है। घटना से कुछ पहले दो आरोपी अयाज खान और इदरीश खान कश्मीर गए थे और आरोपियों के आतंकी संगठनों से संबंध होने की बात सामने आई है। इस मामले को पुलिस संभवतः राष्ट्रीय जांच एजेंसी को भी सौंप सकती है।

कवर्धा एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव ने बताया कि आरोपियों के मोबाइल और लैपटॉप में कई साक्ष्य मिले हैं। ISIS पैटर्न में गला काटकर हत्या की जाती है। इस एक्ट के तहत आरोपियों को फांसी या उम्र कैद की सजा तय है। हत्या का प्रमुख कारण भी आज स्पष्ट किया गया कि 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर की उद्घाटन होना था। उससे ठीक एक दिन पहले हिन्दू समुदाय में दहशत फैलाने इस घटना को अंजाम दिया गया था।

आरोपियों को घर को पुलिस ने ढहाया
पुलिस की मानें तो अब इस मामले का NIA जांच एजेंसी को जानें की उम्मीद है। बता दें 21 जनवरी को साधराम यादव का गला काटकर हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद लगातार यह मामला गरमा हुआ है। कई हिन्दूवादी संगठनों और समाज द्वारा आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की जा रही है। कवर्धा पुलिस ने आरोपियों के घर जो अवैध रूप से बने थे उसका भी ढहा दिया गया है। एसपी डॉ. अभिषेक पहल के निर्देश पर कवर्धा पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है।

जानिए क्या है UAPA कानून
UAPA की धारा-15 आतंकी गतिविधि को परिभाषित करती है। इस कानून के तहत कम से कम 5 साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। अगर आतंकी घटना में किसी की जान चली जाती है तो दोषी व्यक्ति को सजा-ए-मौत या फिर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। अगर कोई भी व्यक्ति आतंक फैलाने के मकसद से देश की अखंडता, एकता, सुरक्षा और संप्रभुता तो खंडित करने की कोशिश करता है या फिर देश या देश के बाहर भारतीयों के साथ आतंकी घटना करने की कोशिश करता है तो वह UAPA कानून के दायरे में आएगा।

IPC के होते क्यों पड़ी UAPA जरूरत
UAPA अकेला ऐसा कानून है जो आतंकवाद और गैरकानूनी गतिविधियों पर लागू होता है। ऐसे कई क्राइम थे, जिनका IPC में जिक्र तक नहीं था। यही वजह रही कि 1967 में गैरकानूनी गतिविधि अधिनियम की जरूरत महसूस की गई और UAPA कानून लाया गया। यह कानून गैरकानूनी और आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम कसने में सक्षम है।

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