RAIPUR. न्यूजअप इंडिया.कॉम
छत्तीसगढ़ के श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च की मान्यता दिलाने के नाम पर किये गए करोड़ों रुपये के घूसकांड में सोमवार को बड़ी कार्रवाई हुई। इस मामले में गिरफ्तार किए गए तीन डॉक्टरों समेत कुल छह आरोपियों को रिमांड खत्म होने पर रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया। विशेष कोर्ट ने सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अब ये सभी आरोपी 21 जुलाई तक जेल में रहेंगे।
बता दें कि जिन आरोपियों को आज कोर्ट में पेश किया गया, उनमें डॉ. मंजुप्पा सी.एन., डॉ. चैत्रा (एमएस), डॉ. अशोक शेलके, रावतपुरा सरकार के निदेशक अतुल कुमार, सतीश और रविचंद्र शामिल हैं। सीबीआई ने पूछताछ के लिए किसी भी आरोपी की रिमांड बढ़ाने की मांग नहीं की, जिसके बाद कोर्ट ने सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सूत्रों के अनुसार CBI को पूछताछ में कई अहम सुराग हाथ लगे हैं, जो इस घोटाले की जड़ों तक पहुंचने में मददगार साबित हो सकते हैं। CBI सूत्रों का कहना है कि इस मामले में आने वाले दिनों में कई और प्रभावशाली लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। मेडिकल कॉलेज की मान्यता दिलाने के लिए कथित तौर पर करोड़ों रुपये की रिश्वत दी गई थी, जिसकी कड़ियां अब धीरे-धीरे खुलती जा रही हैं।
क्या है पूरा मामला यह भी जानिए?
कॉलेज की मान्यता के नाम पर पहले भी 1 करोड़ 62 लाख रुपये की राशि की डील हुई थी, जिसकी शिकायत 2024 में की गई थी। इसके बाद अब 55 लाख रुपये के लेन-देन का मामला सामने आया है। बेंगलुरु के दो डॉक्टरों के पास हवाला के जरिए पैसा पहुंचा था। रविंद्र और सतीश ने केवल पैसा हासिल किया था। CBI द्वारा अदालत के समक्ष पेश दस्तावेजों में बताया गया कि श्री रावतपुरा सरकार आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान (SRIMSR) आगामी आधिकारिक निरीक्षण के बारे में गोपनीय और अग्रिम जानकारी प्राप्त करने की साजिश में शामिल था। श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च, नवा रायपुर ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से मान्यता प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था।
सीबीआई के मुताबिक श्री रावतपुरा सरकार संस्थान के निदेशक अतुल कुमार तिवारी ने गीतांजलि विश्वविद्यालय, उदयपुर, राजस्थान के रजिस्ट्रार मयूर रावल के साथ मिलीभगत करके गैरकानूनी तरीके से ऐसी विशेषाधिकार प्राप्त जानकारी हासिल करने की कोशिश की। यह भी आरोप लगाया गया है कि मयूर रावल ने गोपनीय निरीक्षण से संबंधित विवरण का खुलासा करने के बदले में 25–30 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। 26 जून 2025 को रावल ने तिवारी को 30 जून 2025 को निर्धारित निरीक्षण की तैयारी करने के लिए सूचित किया था। इसके अलावा रावल ने तिवारी को नामित निरीक्षण दल के सदस्यों के नाम भी बता दिए, जिससे आधिकारिक गोपनीयता भंग हुई और इस तरह के निरीक्षणों को नियंत्रित करने वाले वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन हुआ।
मनचाहा रिपोर्ट जारी करने की डील हुई
सीबीआई अफसरों ने बताया कि मयूर रावल द्वारा सूचित एनएमसी द्वारा नामित 4 मूल्यांकनकर्ताओं वाली निरीक्षण टीम 30 जून 2025 को SRIMSR, रायपुर में निरीक्षण को पहुंची। निरीक्षण दल के सभी 4 सदस्यों ने SRIMSR के निदेशक अतुल कुमार तिवारी के साथ साजिश रची और एक अनुकूल निरीक्षण रिपोर्ट जारी करने के लिए रिश्वत लेने पर सहमत हुए। निरीक्षण दल के सदस्यों में शामिल कर्नाटक के मंड्या स्थित मंड्या इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के ऑर्थोपेडिक्स विभाग की प्रमुख और प्रोफेसर डॉ. मंजुप्पा सी.एन. ने डॉ. सतीश ए को बताया कि हवाला ऑपरेटर से उसे फोन आएगा कि रकम कैसे एकत्र की जानी है। इसके साथ डॉ. मंजुप्पा ने निरीक्षण दल की एक अन्य सदस्य डॉ. चैत्रा से भी बात कर बताया कि उसका हिस्सा सतीश द्वारा उसके निवास पर पहुंचाया जाएगा या कोई इसे सतीश से एकत्र कर सकता है। यह लेन-देन 30 जून को ही होने की संभावना थी।
सीबीआई ने रिश्वत की रकम जब्त की
मामला दर्ज होने के बाद सीबीआई ने बैंगलोर में जाल बिछाया और 55 लाख रुपये की रिश्वत की रकम बरामद की गई। रिश्वत की कुल रकम में से 16.62 लाख रुपये आरोपी डॉ. चैत्रा के पति रविचंद्र से और 38.38 लाख रुपये आरोपी डॉ. मंजुप्पा के सहयोगी सतीश से बरामद किए गए। जांच के दौरान आरोपी डॉ. मंजुप्पा सी.एन., डॉ. चैत्रा एमएस, डॉ. अशोक शेलके और एसआरआईएमएसआर के डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी को एक जुलाई को रायपुर से गिरफ्तार किया गया है। वहीं रविचंद्र और सतीश को बैंगलोर से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया है। सीबीआई के वकील ने विशेष अदालत को बताया कि विभिन्न स्थानों पर तलाशी ली गई है और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए हैं। मामले की जांच अभी जारी है।